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मनुस्मृति को हम क्यों जलाएं?

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बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने हजारों लोगों के साथ 25 दिसंबर 1927 ई. को महाड़ तालाब जल सत्याग्रह के अवसर पर मनुस्मृति का दहन कर बहुजन समाज के लिए भारत में मानवीय अधिकारों नींव रखी थी। आज वह महान ऐतिहासिक दिवस है। मनुस्मृति ब्राह्मणों का काला कानून है जो सदियों से आजतक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और महिलाओं को गुलाम बना रखा है। इस ग्रंथ के कारण जाति व्यवस्था, ऊंच-नीच, छूआछूत और लिंग विभेद आज भी पूरे समाज में फैला हुआ है। इसलिए हम बहुजन समाज के लोग आज जगह -जगह लोकतंत्र एवं मानवता विरोधी मनुस्मृति का दहन कर भारत में संविधान,समता, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। मनुस्मृति दुनिया और भारत की सबसे निकृष्टतम ब्राह्मणवादी किताब है। आइए, मनुस्मृति के श्लोकों से इसकी निकृष्टता को देंखे -- 1- नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की पेशे को लोभवश ग्रहण कर जीविका–यापन करे तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीन कर उसे तत्काल निष्कासित कर दे।10/95-98 2-ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है। इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है, उसका ...

वैदिक धर्म, ब्रह्मण धर्म और हिंदू धर्म में शूद्रों-महिलाओं के लिए...

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वैदिक धर्म, ब्रह्मण धर्म और हिंदू धर्म में शूद्रों-महिलाओं के लिए किस कदर घृणा भरी है और ब्राह्मणों की महानता का कितना बखान है, उसे मनुस्मृति के इन चंद श्लोंको से समझा जा सकता है- (25 दिसंबर: मनुस्मृति दहन दिवस) ● यदि कोई शूद्र ब्राह्मण के विरुद्ध हाथ या लाठी उठाए, तब उसका हाथ कटवा दिया जाए और अगर शूद्र गुस्से में ब्राह्मण को लात से मारे, तब उसका पैर कटवा दिया जाए. (8/279-280) ● इस पृथ्वी पर ब्राह्मण–वध के समान दूसरा कोई बड़ा पाप नहीं है. अतः राजा ब्राह्मण के वध का विचार मन में भी न लाए. (8/381) ● शूद्र यदि अहंकारवश ब्राह्मणों को धर्मोपदेश करे तो उस शूद्र के मुँह और कान में राजा गर्म तेल डलवा दें. (8/271-272) ● शूद्र को भोजन के लिए झूठा अन्न, पहनने को पुराने वस्त्र, बिछाने के लिए धान का पुआल देना चाहिए. ● नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की वृत्ति को लोभवश ग्रहण कर जीविका–यापन करे, तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीन कर उसे तत्काल निष्कासित कर दे. (10/95-98) ● ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है. इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है, उसका कर्म निष्फल हो...

मनुस्मृति दहन दिवस

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भारत की सबसे उत्कृष्ट किताब ( जाति के विनाश ) के लेखक ने आज के दिन भारत की सबसे निकृष्ट किताब को जलाया था- ( मनुस्मृति दहन दिवस-25 दिसंबर) मनुस्मृति भारत की सबसे अमानवीय एवं निष्कृट किताब है, जो बहुसंख्यक शूद्रों एवं महिलाओं की गुलामी का दस्तावेज है। मनुस्मृति में बहुसंख्यक इंसानों के प्रति जितनी नफरत है शायद ही दुनिया के किसी किताब में मौजूद हो। भारत को बीमार एवं पतनशील समाज बनाने में यदि किसी एक किताब का सर्वाधिक योगदान है, तो उस किताब का नाम मनुस्मृति है। यह किताब ब्राह्मण मर्दों को भूदेवता का दर्जा देती है और शूद्रों एवं महिलाओं को इंसानी दर्जा भी नहीं देती है। यह बहुसंख्यक इंसानों के प्रति निर्ममता और क्रूरता का दस्तावेज है। इसके हर पन्ने पर नफरत ही नफरत भरी है। दुखद यह है कि आज के भारत के मालिक संघ-भाजपा के नायकों की यह प्रिय किताब है। यह इतनी निकृष्ट दर्जे की किताब है कि डॉ. आबेडकर जैसे करुणाशील एवं पुस्तक प्रेमी महामानव को भी इसे जलाना पड़ा। मेरी नजर में भारत की सबसे उत्कृष्ट और महान किताब डॉ. आंबेडकर की जाति का विनाश है। जिसमें उन्होंने भारत की बीमारी की मूल जड़ वर्ण-जाति व्य...