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Social Justice

बामसेफ - BAMCEF

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BAMCEF संघटन पेट पालने के लिये बनाया हुवा संघटन नहीं हैं।  यह एक विशाल शक्ती का नाम है जो मा. वामन मेश्राम साहेब ने दीन रात मेहनत कर के बनाई हैं...जिस को BAMCEF क्या है ये पता नहीं हैं।  ओर जो BAMCEF को पेट पालने का साधन समज बताते हैं वो इस पोस्ट को जरूर पढे। धन्यवाद! कौन और क्या है बामसेफ? वामन मेश्राम? बामसेफ आज तक क्या किया का जवाब शब्दों में देंगे तो कम पड़ जायेगा। 1- बामसेफ ने एक राजनीतिक पार्टी को जन्म दिया। 2- बामसेफ ने महापुरुषों के मिशन को पुनर्जीवित किया। 3- बामसेफ ने पूना समझौते का पर्दा फाश कर कांग्रेस, गांधी और BJP को नंगा किया।  4- बामसेफ ने महापुरुषों का सच्चा मिशन समझाया। 5- बामसेफ ने ये बताया कि भारत पर ब्राह्मण राज स्थापित हो गया है। 6- बामसेफ ने लीडरशिप की फैक्टरी निर्माण की और बहिन मायावती जी मुख्यमंत्री बनी। 7- बामसेफ ने 2003-07 तक लगातार सेज कानून का विरोध किया और आदिवासियों को वापिस अपनी जमीन दिलवाई। 8- बामसेफ ने बाबा साहब की हत्या करने वालों का पर्दाफाश किया। 9- बामसेफ ने ये बताया कि कांग्रेस ही आरएसएस की मा है और बीजेपी कि नानी और बाकी सबकी नजदीक ...

मनुस्मृति को हम क्यों जलाएं?

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बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने हजारों लोगों के साथ 25 दिसंबर 1927 ई. को महाड़ तालाब जल सत्याग्रह के अवसर पर मनुस्मृति का दहन कर बहुजन समाज के लिए भारत में मानवीय अधिकारों नींव रखी थी। आज वह महान ऐतिहासिक दिवस है। मनुस्मृति ब्राह्मणों का काला कानून है जो सदियों से आजतक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और महिलाओं को गुलाम बना रखा है। इस ग्रंथ के कारण जाति व्यवस्था, ऊंच-नीच, छूआछूत और लिंग विभेद आज भी पूरे समाज में फैला हुआ है। इसलिए हम बहुजन समाज के लोग आज जगह -जगह लोकतंत्र एवं मानवता विरोधी मनुस्मृति का दहन कर भारत में संविधान,समता, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। मनुस्मृति दुनिया और भारत की सबसे निकृष्टतम ब्राह्मणवादी किताब है। आइए, मनुस्मृति के श्लोकों से इसकी निकृष्टता को देंखे -- 1- नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की पेशे को लोभवश ग्रहण कर जीविका–यापन करे तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीन कर उसे तत्काल निष्कासित कर दे।10/95-98 2-ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है। इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है, उसका ...

वैदिक धर्म, ब्रह्मण धर्म और हिंदू धर्म में शूद्रों-महिलाओं के लिए...

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वैदिक धर्म, ब्रह्मण धर्म और हिंदू धर्म में शूद्रों-महिलाओं के लिए किस कदर घृणा भरी है और ब्राह्मणों की महानता का कितना बखान है, उसे मनुस्मृति के इन चंद श्लोंको से समझा जा सकता है- (25 दिसंबर: मनुस्मृति दहन दिवस) ● यदि कोई शूद्र ब्राह्मण के विरुद्ध हाथ या लाठी उठाए, तब उसका हाथ कटवा दिया जाए और अगर शूद्र गुस्से में ब्राह्मण को लात से मारे, तब उसका पैर कटवा दिया जाए. (8/279-280) ● इस पृथ्वी पर ब्राह्मण–वध के समान दूसरा कोई बड़ा पाप नहीं है. अतः राजा ब्राह्मण के वध का विचार मन में भी न लाए. (8/381) ● शूद्र यदि अहंकारवश ब्राह्मणों को धर्मोपदेश करे तो उस शूद्र के मुँह और कान में राजा गर्म तेल डलवा दें. (8/271-272) ● शूद्र को भोजन के लिए झूठा अन्न, पहनने को पुराने वस्त्र, बिछाने के लिए धान का पुआल देना चाहिए. ● नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की वृत्ति को लोभवश ग्रहण कर जीविका–यापन करे, तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीन कर उसे तत्काल निष्कासित कर दे. (10/95-98) ● ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है. इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है, उसका कर्म निष्फल हो...

मनुस्मृति दहन दिवस

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भारत की सबसे उत्कृष्ट किताब ( जाति के विनाश ) के लेखक ने आज के दिन भारत की सबसे निकृष्ट किताब को जलाया था- ( मनुस्मृति दहन दिवस-25 दिसंबर) मनुस्मृति भारत की सबसे अमानवीय एवं निष्कृट किताब है, जो बहुसंख्यक शूद्रों एवं महिलाओं की गुलामी का दस्तावेज है। मनुस्मृति में बहुसंख्यक इंसानों के प्रति जितनी नफरत है शायद ही दुनिया के किसी किताब में मौजूद हो। भारत को बीमार एवं पतनशील समाज बनाने में यदि किसी एक किताब का सर्वाधिक योगदान है, तो उस किताब का नाम मनुस्मृति है। यह किताब ब्राह्मण मर्दों को भूदेवता का दर्जा देती है और शूद्रों एवं महिलाओं को इंसानी दर्जा भी नहीं देती है। यह बहुसंख्यक इंसानों के प्रति निर्ममता और क्रूरता का दस्तावेज है। इसके हर पन्ने पर नफरत ही नफरत भरी है। दुखद यह है कि आज के भारत के मालिक संघ-भाजपा के नायकों की यह प्रिय किताब है। यह इतनी निकृष्ट दर्जे की किताब है कि डॉ. आबेडकर जैसे करुणाशील एवं पुस्तक प्रेमी महामानव को भी इसे जलाना पड़ा। मेरी नजर में भारत की सबसे उत्कृष्ट और महान किताब डॉ. आंबेडकर की जाति का विनाश है। जिसमें उन्होंने भारत की बीमारी की मूल जड़ वर्ण-जाति व्य...

Kerala Model of Economic Growth Vs Gujrat Model

 Siddharth Ramu केरल में अब कोई गरीबी रेखा के नीचे नहीं है। हम भारतीयों को क्यों केरल मॉडल पर गर्व होना चाहिए?  ( गरीबी के आंकड़ों का स्रोत-द हिंदू, 23 अक्टूबर, 2025)  योजना आयोग को खत्म कर नरेंद्र मोदी सरकार ने नीति आयोग गठित किया। इसी नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार केरल में सिर्फ 0.7 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा ( इसे अत्यधिक गरीबी भी कहा जाता है।) के नीचे हैं। केरल की सरकार ने इन 0.7 प्रतिशत परिवारों के चिन्हित किया और इनकी गरीबी को खत्म करने के लिए विशेष कदम उठाए। इसके नतीजे के तौर अब यह स्थिति है कि केरल में कोई परिवार  या व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे नहीं है। इसकी औपचारिक घोषणा केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने की। केरल की इस उपलब्धि को सेलीब्रेट करने के लिए 1 नवंबर को केरल की राजधानी तिरुवनन्तपुरम में आयोजन होगा। यदि नीति आयोग के आंकड़ों ( 2021) आधार पर देखें तो पूरे भारत में गरीबी रेखा के नीचे 14.96 प्रतिशत लोग हैं। गुजरात में 11.66 प्रतिशत, बिहार में 33.76 प्रतिशत और यूपी में 22.93 प्रतिशत लोग हैं। गरीबी रेखा के इस पैमाने को बहुआयी गरीबी ( Multidimensiona...

हिन्दू धर्म

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भारत के एक जनगणना आयुक्त की 1921 की रिपोर्ट में लिखा है, "कोई भी भारतीय अपने धर्म के तौर पर 'हिंदू' शब्द से परिचित नहीं है।" उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक अंग्रेजी भाषा में शिक्षित कुछ ही ऊंची जाति के भारतीय थे जो हिंदू धर्म के हिस्से के रूप में अपनी पहचान बना रहे थे। चूंकि पिछली शताब्दी में ही “हिंदू” शब्द साफ तौर पर सामने आया जिसका मतलब एक राज्य से और एक बड़ी आबादी से था जिसमें विशेष रूप से निचली जातियों को बिना मशविरा किए शामिल कर लिया गया था। इससे यह बात पूरी तरह साबित होती है “हिंदू धर्म” बीसवीं सदी का आविष्कार है। उपमहाद्वीप के लंबे इतिहास में प्रभावशाली सवर्ण समुदाय खुद को और दूसरों को एक ही धर्म का मानने को तैयार नहीं थे, बल्कि वे अपनी पहचान अलग-अलग जातियों से करते थे और हाल के बढ़ते जातिगत अत्याचार यह दर्शाते हैं कि यह तथ्य अभी भी नहीं बदला है। शुरुआत में वे खुद को नीची जाति के लोगों के साथ जिन्हें वे नीच और अछूत मानते थे, एक ही श्रेणी में रखने पर भी ऐतराज जताते थे। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में जाहिर तौर पर देखा गया कि कैसे मुख्य रूप से सवर्ण राष्ट्रवादी नेताओं ...

संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ!

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संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ! वोट के अधिकार की रक्षा करो! बिहार को बदलाव की दिशा में ले चलो! बहुजन विरासत और दावेदारी को बुलंद करो! सामाजिक न्याय आंदोलन(बिहार) का          भागलपुर जिला सम्मेलन.     11 बजे दिन से,3 अगस्त 2025 डॉ.अंबेडकर भवन(सुंदरवन),बरारी रोड,भागलपुर. साथियो भाजपा-आरएसएस के राज में संविधान व लोकतंत्र पर लगातार हमला जारी है। जीवन के हरेक क्षेत्र में सवर्ण वर्चस्व को मजबूत बनाया जा रहा है तो देश की संपत्ति व संसाधनों को अंबानी-अडानी जैसे मुट्ठीभर पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। बहुजनों ने लंबे संघर्ष से जो संवैधानिक-लोकतांत्रिक अधिकार हासिल किया है, उसको लगातार छीना जा रहा है। इस कड़ी में अब वोट के अधिकार पर डाका डालने की साजिश चल रही है। इसके लिए ही बिहार में अचानक से विधानसभा चुनाव के तीन महीने पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरु की गयी है। बहाना है कि अवैध वोटरों को हटाया जाएगा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस प्रक्रिया के शुरु करने के समय...

आदिवासी भूमि या रणभूमि

 बस्तर संभाग के सर्व आदिवासी समाज व भारत देश के नागरिक गण को, सेवा जोहार, अत्यंत दुख के साथ लिख रही हूँ।  हमारा बस्तर पूंजीपतियों के लालच को पूरा करने के लिए विनाशकार युद्ध भूमि बन चुका है। ये हम सबको पता है।  बस्तर की लडाई के दौरान कुछ वर्ष पहले पुलिस विभाग के एक उच्च अधिकारी ने मुझसे कहा था कि आदिवासियों का कभी कोई अस्तित्व ना था ना कभी रहेगा। ना कोई औकात, ना कोई जीवन ना कोई पहचान। आदिवासियों को कीड़े मकोड़ों की तरह कुचलना है, मारना है। यही सत्य है। इस सच को अपने दिमाग अपनी सोच में अच्छी तरह डाल लो यही तुम्हारी औकात है।  हाल ही में जब मुझे ये जानकारी मिली। कि कर्रेगुटटा जंगल में पहाड़ो से नक्सली के नाम से भारी संख्या में आदिवासियों को मार कर लाये है। उनके परिवार वाले बहुत परेशान है। भूखे प्यासे रहकर लाशों को ले जाने के लिए लड़ रहे हैं लेकिन  पुलिस प्रशासन लाश नहीं दे रहा है।  उस स्थिति में दिनांक 12-5-2025 को मैं जिला बीजापुर अस्पताल में पहुंच गई। कई गांव के आदिवासी लोग अस्पताल से बीजापुर थाना। थाने से अस्पताल चक्कर काट रहे थे। इसी बीच मैं गांव के लोगो से ...

ठीक नहीं हुआ प्रधानमंत्री जी!

 प्रेमकुमार मणि  पहलगाम घटना के तुरत बाद प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह बिहार में जा कर गरजे थे, मुझे अनुमान हुआ था कि पुलवामा की तरह ही कुछ हल्का-फुल्का अभ्यास होगा ताकि लोगों के गुस्से को शांत किया जा सके। घटनाओं की तुलना नहीं करना चाहता, किन्तु पुलवामा की घटना अधिक भयावह थी। हमारी सेना के चालीस जवान विस्फोट में उड़ा दिए गए थे. यह सीधे सेना को चुनौती थी। पहलगाम में निहत्थे सैलानियों को घेर कर उनका परिचय पूछ कर मारा गया। यह कायराना हमला था। परिचय जान कर गोली मारने के पीछे मकसद था कि सांप्रदायिक तनाव बनाया जाय। जब शत्रु उकसावे तब हमें विवेक से काम लेना चाहिए, एकबारगी क्रोध में नहीं आना चाहिए। जवाब देने केलिए सही समय का इन्तजार करना चाहिए। यह न पुलवामा के बाद हुआ, न पहलगाम के बाद। 1965 और 1971 में इस से कम गंभीर मामले पर त्वरित और ठोस कार्रवाई हुई थी। उस से सरकार सबक तो ले सकती थी। प्रधानमंत्री का विदेश यात्रा को स्थगित कर देश लौटना सही था। लेकिन अगले रोज सर्वदलीय बैठक में न शामिल हो कर उनका बिहार की एक उद्घाटन रैली में पहुँच जाना अफसोसजनक था। सर्वदलीय बैठक की गरिमा उन्होंने गिराई। ब...

अपने तो अपने होते हैं - महाराजा बिजली पासी जयंती: लालू प्रसाद यादव

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https://www.facebook.com/share/p/o1S94XfMSACBXNh6/ कल महाराजा बिजली पासी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। पासी समाज के लिए हमने बहुत कुछ किया है। पहले ताड़ के पेड़ों से ताड़ी उतारने के लिए लोगों को टैक्स देना होता था। सरकार की ओर से ताड़ी टैक्स वसूला जाता था। मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद मैंने पासी भाईयों के लिए सदियों से चले आ रहे ताड़ी टैक्स (Palm Tree Tax) को माफ किया था।  मुझे स्मरण है 1990-91 में एक दफ़ा सभा में उपस्थित पासी भाइयों से मैंने पूछा कि, ”पासी भाई दिखाएं कि ताड़ के पेड़ पर चढ़ने से उनके करेजा पर घट्ठा पड़ा है कि नहीं। (घट्ठा - त्वचा के ऊपर ऐसा घाव होता है जिसमें कुछ दूर तक चमड़ी कड़ी और काली हो जाती है)  मैंने कहा कि, ”करेजा पर घट्ठा होई त देखावे के परी”। फिर क्या था भीड़ में शामिल पासी समाज के लोग कुर्ता- कमीज का बटन खोलने की बजाय सीधे फाड़ कर दिखाने लगे कि, “देखीं साहेब, हमरो करेजा पर घट्ठा बा” पहले की सामंती व्यवस्था में शोषक लोग दलित-पिछड़ी जाति के लोगों का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और मानसिक से लेकर शारीरिक शोषण भी करते...

Dalit Chintan Thought on Differnt Social Media

1. (756) साहित्य आज तक के मंच पर प्रो.रतन लाल का गुस्सा सातवें आसमान पर - YouTube 2.  Sahitya Aajtak 2024: संविधान के 75 बरस: 2 दलित साहित्य, समाज और संविधान | Mohan Dass | Sheoraj Singh 3. It will be added more links in further days. 

The Reality of RSS

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  'यह आप बिलकुल अच्छी तरह से जानते हैं कि इन लोगों ने मरने का फैसला कर लिया है |  यह कोई मज़ाक नहीं है | मैं कानून मंत्री को बताना चाहता हूँ कि वो इस बात को समझें कि कोई आम इंसान जान बूझ कर फाका करके मरने का फैसला नहीं कर सकता | आप थोड़ी देर के लिए भी ऐसा करके तो देखिये आपको खुद समझ में आ जाएगा |' जो इंसान भूख हडताल करता है वह अपनी आत्मा की आवाज़ पर ऐसा करता है | वह अपनी आत्मा की बात सुनता है और उसे विश्वास होता है कि वह सच्चे और इन्साफ के रास्ते पर है | वह कोई आम इंसान नहीं है जो ठन्डे दिमाग से किये गये दुष्टतापूर्ण अपराध का अपराधी हो ' - मोहम्मद अली जिन्नाह  नेशनल असेम्बली में भगत सिंह के पक्ष में बोलते हुए  दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक गोलवरकर भगत सिंह की कुर्बानी के आलोचक थे, देखिये उन्होंने भगत सिंह के खिलाफ क्या लिखा है  ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (गोलवलकर के भाषण और लेखों का संकलन, जिसे संघ में पवित्र ग्रंथ माना जाता है) के कई अंश हैं जहां उन्होंने शहादत की परंपरा की निंदा की है. ‘इस बात में तो कोई संदेह नहीं है कि ऐसे व्यक्ति जो शहादत को गले लगाते है...

कांग्रेस का दोहरा रूप

 बाबा साहब को भारत रत्न देने से मंडल कमीशन लागू करने और ओबीसी आरक्षण तक, कांग्रेस के शासन में ओबीसी और एससी के काम क्यों नहीं होते हैं? - बाबा साहब को कांग्रेसी शासन में भारत रत्न नहीं मिला. बाबा साहब के जन्म दिन की छुट्टी कांग्रेसी शासन में नहीं दी गई. बाबा साहब को भारत रत्न वीपी सिंह सरकार ने 1990 में दिया, जिसका समर्थन बीजेपी कर रही थी.  - सरदार पटेल को भारत रत्न इसके भी बाद जाकर मिला. पता नहीं कांग्रेस को क्या समस्या थी? - मंडल कमीशन का गठन 1978 में हुआ, जब केंद्र में जनता पार्टी की सरकार थी, जिसमें जनसंघ (अब भी बीजेपी) शामिल थी. आडवाणी और वाजपेयी मंत्री थे.  - कांग्रेस इस रिपोर्ट पर बैठी रही. ये रिपोर्ट 1990 में लागू होती है. संयोग है कि इस सरकार का समर्थन बीजेपी कर रही थी. बीजेपी ने संसद में रिपोर्ट लागू करने का समर्थन किया. कांग्रेस ने विरोध किया.  - राजीव गांधी ने मंडल कमीशन के खिलाफ लोकसभा में जो भाषण दिया, वह उनके जीवन का सबसे लंबा भाषण था. - ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा मोदी सरकार में मिला.  - 1986 से मेडिकल एडमिशन में ऑल इंडिया सीटों का नियम लागू था...

Bulldozing: Its Harmful, not a Democratic Steps for Democracy In Uttar Pradesh

  Educate!                                                         Agitate!!                                                               Organize!!! Bulldozing Lives: Caste Violence and State Brutality in Uttar Pradesh      Uttar Pradesh has become a site of concentration camps for Dalits and Muslims. The Chief Minister of Uttar Pradesh, Yogi Adityanath, popularized by Manu media as 'Bulldozer Baba', openly threatens and murders people from oppressed communities. The double-engine government has ensured nothing but double humiliation, harassment, and oppression of Dalits and Muslims in the State. The State-sponsored ...